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मोदी राज में रुपए की ऐतिहासिक गिरावट, मौद्रिक नीति के विशेषज्ञ चेतन भगत और श्री श्री रविशंकर ने साधा मौन

भारतीय जनता पार्टी की सरकार में 2018 के दौरान रुपया 8 फीसद से ज़्यादा कमजोर हुआ है।

बढ़ती राजनीतिक अनिश्चितता के बीच रुपया अपने रिकॉर्ड निचले स्तर पर लुढ़क गया। मोदी सरकार के खिलाफ लाये गए अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान के पहले ही रुपए में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई। रुपया अमेरिकी डाॅलर के मुकाबले 69.12 के नये निचले स्तर पर लुढ़क गया है। यह रुपए में अबतक की सबसे ज़्यादा गिरावट है।

इससे पहले पिछले महीने 28 जून को रुपया पहली बार 69.10 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक लुढ़क गया था, लेकिन बाद में रिजर्व बैंक ने स्थिति पर काबू पा लिया था।

बीजेपी सरकार में रुपए के मूल्य में लगातार गिरावट आ रही है। भारतीय जनता पार्टी की सरकार में 2018 के दौरान रुपया 8 फीसद से ज़्यादा कमजोर हुआ है।

रुपए के मूल्य में भारी गिरावट पर तथाकथित मौद्रिक नीति के विशेषज्ञ चेतन भगत और श्री श्री रविशंकर जैसे लोगों ने मौन साध ली है। 2013 में यूपीए की सरकार में जब डाॅलर के मुकाबले रुपए का मूल्य 60 तक पहुँच गया था तो इन्होंने काफी चिंता ज़ाहिर की थी।

2014 में आम चुनाव के पहले श्री श्री रविशंकर ने अपने ट्वीटर हैंडल से एक ट्वीट किया था जिसमें उन्होंने कहा था कि यदि मोदी सरकार सत्ता में आए तो अमेरिकी डाॅलर के मुकाबले रुपया मजबूत होकर 40 तक पहुँच जाएगा।

आज रुपया जब रिकाॅर्ड निचले स्तर तक लुढ़क गया है तो इनकी चुप्पी राजनीतिक स्वार्थ की ओर इशारा करती है।

इसके अलावा, 2013 में नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर कहा था कि रुपये के मूल्य में गिरावट उसके ‘आकार’ के कारण नहीं बल्कि दिल्ली में बैठे लोगों की वजह से जो भ्रष्टाचार में लीन है।

इससे पहले रुपया यूपीए के समय 28 अगस्त 2013 को ऑल टाइम लो पर पहुंचा था, यानी रुपए में सबसे ज़्यादा गिरावट आई थी। उस समय विपक्ष में रही भाजपा ने काफी हो-हल्ला मचाया था। उस समय सुषमा स्वराज ने एक ट्वीट कर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर कटाक्ष किया था कि “रुपया अपना मूल्य खो चुका है और प्रधानमंत्री अपनी शोभा खो चुके हैं”।

तो क्या प्रधानमंत्री सच में अपनी “शोभा” खो चुके है?

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