मोदी सरकार योजनाएं: नाम बड़े दर्शन छोटे? आंकड़े देखें:
मोदी सरकार की प्रमुख योजनाएं स्वच्छ भारत अभियान, प्रधान मंत्री आवास योजना एवं स्मार्ट सिटी अभियान अपर्याप्त बजट आवंटन के कारण आगे बढ़ने में असफल हैं। यह निष्कर्ष है संसद की शहरी विकास स्थायी समिति की रिपोर्ट का जो की संसद में ९ मार्च को पेश की। समिति ने सरकार की कड़ी निंदा करते हुए… Continue reading मोदी सरकार योजनाएं: नाम बड़े दर्शन छोटे? आंकड़े देखें:
मोदी सरकार की प्रमुख योजनाएं स्वच्छ भारत अभियान, प्रधान मंत्री आवास योजना एवं स्मार्ट सिटी अभियान अपर्याप्त बजट आवंटन के कारण आगे बढ़ने में असफल हैं।
यह निष्कर्ष है संसद की शहरी विकास स्थायी समिति की रिपोर्ट का जो की संसद में ९ मार्च को पेश की। समिति ने सरकार की कड़ी निंदा करते हुए कहा की यह गंभीर मामला है की प्रमुख योजनाएं जिन्हे सामाजिक परिवर्तन का साधन कह कर ज़ोर शोर से प्रचारित किया जाता है, उन्हें नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।
उत्तर-पूर्व के सन्दर्भ में भी समिति ने वादों और बजट आवंटन के बीच अंतर होने पर नाराज़गी व्यक्त करते हुए कहा की वे उत्तर-पूर्व में योजनाओं के खराब प्रदर्शन से नाखुश हैं जबकि वहां लम्बे बरसात के मौसम, भूस्खलन, मुश्किल इलाका, श्रम समस्या आदि बाधाएं कार्यान्वयन में रुकावटें पैदा करती हैं। समिति ने ये भी कहा की मंत्रालय ने कुल बजट में से केवल। 0.96 % उत्तर-पूर्वी क्षेत्र व् उत्तर-पूर्वी क्षेत्र शहरी विकास योजना जैसी योजनाओं को दिया है जबकि इनके लिए काम से काम 10 % का आवंटन आवश्यक है.
स्मार्ट सिटी अभियान के विषय में समिति ने कहा की सरकार द्वारा किये गए दावों और ज़मीनी सचाई में काफी फर्क है. समिति ने कहा की क्रियाविधि की उपलब्धिता के बावजूद अभियान में ख़राब काम की शिकायतें अब तक समिति को मिल रही हैं। (मोदी सरकार ने 2014 में 100 स्मार्ट शहर निश्चित करने व् बनाने का वादा किया था)
स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत 66,42,220/- के वादे के विपरीत सिर्फ 4322776 घरेलू शौचालयों का निर्माण किया गया। “इस रफ़्तार से, जबकि अभियान की समाप्ति में सिर्फ 20 महीने शेष हैं, पैनल को संदेह है की सरकार अभियान में निर्धारित लक्ष्य की प्राप्ति कर पाएगी।”
“समिति को गगहन संदेह है की देश को खुले में शौच मुक्त घोषित करने की समय सीमा को पछाड़ने की होड़ में ज़मीनी सच्चाइयों को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।” ( विशिष्ट मानदंडों के अनुसार अब तक 2148 शहरों एवं 12 राज्यों को खुले में शौच मुक्त घोषित किया जा चूका है।)
प्रधानमंत्री आवास योजना पर टिपण्णी करते हुए समिति ने कहा की इस योजना के कार्यान्वयन में सब कुछ ठीक नहीं है और इसकी प्रगति निराशाजनक है। समिति ने बताया की वर्ष 2022 तक 120 लाख घर उपलब्ध कराने के निर्धारण के विपरीत अब तक सिर्फ 25.04 लाख घर निर्माणित या निर्माणाधीन हैं।
धनाभाव के दावे पर प्रकाश डालते हुए समिति ने कहा की जहाँ परियोजना की कुल लागत 2.04 लाख करोड़ रुपये है जिसमें से केंद्र सरकार का योगदान 57699 करोड़ है, केंद्र सरकार ने सिर्फ २६१६२ करोड़ यानी करीब आधी राशि देनी की स्वीकृति दी है।

