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भोपाल: लाखों खर्च कर तालाब को गहरा किया निगम ने और फिर तालाब में ही छोड़ दी मिट्टी

तालाब संरक्षण और गहरीकरण अभियान पर 53 लाख रुपए खर्च किए और प्रवासी पक्षियों के नाम पर मलबे को तालाब में ही छोड़ गए

मध्यप्रदेश में सरकारी कामों में लीपा-पोती का क्रम जारी है। राज्य के राजधानी के तालाबों को संरक्षित करने के उद्देश्य से सरकार ने लाखों खर्च किए लेकिन स्थिति जस की तस ही है।

नईदुनिया के अनुसार नगर निगम ने तालाब संरक्षण और गहरीकरण अभियान के तहत दो महीने पहले बड़े पैमाने पर तालाब की तलहटी से गाद निकाला था। सरकार ने इसे पूरे अभियान पर 53 लाख रुपए खर्च किए थे। इस अभियान की शुरुआत भदभदा क्षेत्र की गई थी, लेकिन भदभदा क्षेत्र में ही तालाब के अंदर दो जगहों पर मलबे का ढेर छोड़ दिया गया है। अब मलवा दो महीने में टापू में तबदील हो गया है।

जब इस बाबत नगर निगम के झील संरक्षण प्रकोष्ठ के अधिकारियों से सवाल किया गया तो उनका जवाब चौंकाने वाला था। उन्होंने बताया कि तालाब के बीच में मिट्टी जानबूझकर नहीं हटाई गई है ताकि तालाब के बीचों बीच बने टापू पर प्रवासी पक्षी बैठ सकें। हालांकि लोगों का कहना है कि यदि तालाब फुल टैंक लेवल तक भरता है तो टापू डूब जाएगा। इस हिसाब से निगम अधिकारियों का यह कहना कहीं न कहीं ग़लत साबित होता है कि प्रवासी पक्षियों के लिए मिट्टी को नहीं हटाई गई है।

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