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पढ़िए स्वर्गीय श्री केदारनाथ सिंह की एक अप्रकाशित कविता|

अबकी वोट देने पहँुचा तो अचानक पता चला मतदाता सूची में मेरा नाम ही नहीं है किसी से कुछ पूछँू कि मेरे भीतर से आवाज आई— उजबक की तरह ताकते क्या हो न सही मतदाता सूची में उस विशाल सूची में तो हो ही जिसमें वे सारे नाम हैं जो छूट जाते हैं बाहर बाहर… Continue reading पढ़िए स्वर्गीय श्री केदारनाथ सिंह की एक अप्रकाशित कविता|

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