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नौकरी जाने की चिंता में डूबे कॉफी बगान के मज़दूर किसान, असम के होने के बावजूद एनआरसी सूची से बाहर

कई मामले तो ऐसे हैं जिसमें परिवार के एक-दो सदस्यों को छोड़कर बाकी को एनआरसी सूची में कर लिया गया है शामिल

पिछले नौ सालों से कॉफी बगान में काम कर रहे हरुन अली(32) भविष्य की चिंताओं में डूबे हैं,उन्हें समझ में ही नहीं आ रहा कि ये कैसे हो सकता है। दरअसल, सोमवार को एनआरसी द्वारा जारी किए गए नागरिकता सूची में उनके नाम के साथ उनके तीन बच्चों का भी नाम शामिल है, पर पत्नी का नाम सूची से गायब है। वे द हिंदू की एक रिपोर्ट में अपना दर्द बयां करते हए कहते हैं कि ” मैंने जब अपने पिता अकबर अली के दस्तावेज़ के साथ फॉर्म भरा था तो वो स्वीकार कर लिया गया वहीं मेरी पत्नी ने अपने पिता के दस्तावेज़ों के साथ अपना फॉर्म भरा तो उसे कैसे रिजेक्ट कर दिया गया। जबकि एनआरसी की सूची में उसके पिता का भी नाम शामिल है।”

एनआरसी मसौदा ज़ारी होने के बाद कर्नाटक के हसन और चिकमंगलूर ज़िले में कॉफी बगान में काम करने वाले मजदूर चिंताग्रस्त हैं। उन्हें भविष्य की चिंता सता रही है। इनमें से कईयों का नाम एनआरसी सूची में नहीं है। जबकि इनमें से अधिकतर असम की ही रहने वाले हैं। कई मामले तो ऐसे हैं जिसमें परिवार एक-दो सदस्यों को छोड़कर बाकी को सूची में शामिल कर लिया गया है। अब वे काम छोड़कर असम अपने घर जाने की योजना बना रहें ताकि नागरिकता की दावेदारी फिर से की जा सके।

आइबीसी कंपनी के हसिरगुड्डा बगाने में काम करने वाली जुल्फा खातून बताती हैं कि एनआरसी सूची में उनके दो बच्चों का नाम नहीं शामिल है। उन्हें नागरिकता की दावेदारी के लिए सरकार द्वारा दोबारा दिए जा रहे मौके का बेसब्री से इंतजार है। वो कहती हैं कि सरकार जितनी जल्दी हो नागरिकता को लेकर दावेदारी वालेे फॉर्म को लेना शुरू करे। उन्हें आवेदन करने के लिए फिर से अपने घर लौटना होगा।

एनआरसी जारी होने के बाद ज़िले में अफरा-तफरी का माहौल बन गया है। सभी अपने परिचितों का एनआरसी सूची में नाम देखने और जानने के लिए उत्सुक हैं।

गौरतलब है कि पिछले एक दशक के दूसरे हिस्सा से असामी लोग कॉफी बगान में काम करने के लिए कर्नाटका जा रहे हैं। पहले वे कोडगु गए फिर हसन और चिक्कामगलरु ज़िले में बड़ी संख्या में काम करने लगे। कॉफी बगान में काम करने वाले अधिकतर लोगों के पास अपनी भूमि नहीं है। ये अमीर लोगों के कॉफी बगानों में मजदूरी करते हैं। असम रोजगार की कमी के कारण महिलाएं भी यहांआकर काम करती हैं,यहां इन्हें सालों भर रोजगार मिल जाता है।

अब एनआरसी के मसौदा ज़ारी होने के बाद इनकी परेशानियां बढ़ गई हैं। ये नागरिकता की दावेदारी के लिए अपने घर की ओर लौट रहे हैं।

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