May a good source be with you.

शिव’राज’ में किसान कर रहे हैं जगह-जगह विरोध प्रदर्शन, शासन प्रशासन की चुप्पी बरकरार

कहीं बेची गईं फसलों के भुगतान के लिए तो कहीं बीमा राशि के लिए किसान हैं संघर्षरत

शिवराज सरकार की कागज़ी योजनाएं ज़मीन पर हकीकत से कोसों दूर दिख रही हैं। इसका एक उदाहरण किसानों के राहत के लिए चलाई जा रही मुख्यमंत्री फसल बीमा योजना भी है। आपदा के चलते किसानों की फसल खराब होने पर राहत देने के लिए इस योजना की शुरुआत की गई थी और राज्य सरकार द्वारा इस योजना का ज़ोर-शोर से प्रचार भी किया गया था। लेकिन आलम ये है कि किसानों को इस योजना का लाभ उठाने के लिए आंदोलन के लिए उतरना पड़ रहा है। कई किसानों को बीमा नहीं मिल रहा और जिन्हें मिल रहा है उनके बीमा की राशि उनके भरे गए प्रीमियम से भी कम है। मजबूर होकर कई ज़िलों के किसान सड़क पर उतर आए हैं।

उज्जैन के नरवर घट्टिया और तराना के सैकड़ों किसानों ने बीमे की राशि नहीं मिलने से परेशान होकर भारतीय किसान संघ के साथ मिलकर कलेक्टर ऑफिस के सामने धरना प्रदर्शन किया। किसानों का बार-बार यही कहना है कि उन्होंने बीघे के हिसाब से बीमा करवाया था जिसकी प्रीमियर राशि जितनी होनी चाहिए उतने रुपए नहीं दिए गए हैं। केंद्र और राज्य के साथ बीमा कम्पनियां भी धोखा दे रही हैं।

वहीं ईनाडु की एक रिपोर्ट के अनुसार मंगलवार को इंदौर के कनाडिया के किसानों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। उनका कहना है कि किसानों की फसल बर्बाद होने पर पटवारी, तहसीलदार और एसडीएम स्तर के अधिकारियों द्वारा सही तरीके से मौका पर जाकर मुआयना कर सर्वे नहीं किया गया था। इस वजह से प्रीमियर राशि भरने के बावजूद भी बीमा की क्लेम राशि नहीं मिली।

पिछले साल सागर संभाग में सूखा पड़ने के कारण किसानों की सोयाबीन की फसल नष्ट हो गई थी। किसानों को लगा था कि फसल बीमा योजना के तहत उन्हें बीमा राशि मिल जाएगी लेकिन 85 किसानों को बीमा योजना की राशि अब तक नहीं मिली।

भारतीय किसान संघ के प्रवक्ता ने बताया कि आईसीआईसीआई लोम्बार्ड बीमा कंपनी ने किसानों को जो नुकसान हुआ है उसके अनुसार बीमा नहीं दिया है। फसल को हुए नुकसान का सही आंकलन भी नहीं किया गया है।

प्रदेश में किसानों का आंदोलन लगातार जारी है। कहीं बेची गईं फसलों के भुगतान के लिए तो कहीं बीमा राशि के लिए किसान संघर्षरत हैं। अजीब बात यह है कि इस मसले पर शिवराज सरकार ने बिलकुल चुप्पी साधी हुई है।

अब आप न्यूज़ सेंट्रल 24x7 को हिंदी में पढ़ सकते हैं।यहाँ क्लिक करें
+